सिटीकिंग परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है। सिटीकिंग परिवार आपका अपना परिवार है इसमें आप अपनी गजलें, कविताएं, लेख, समाचार नि:शुल्क प्रकाशित करवा सकते है तथा विज्ञापन का प्रचार कम से कम शुल्क में संपूर्ण विश्व में करवा सकते है। हर प्रकार के लेख, गजलें, कविताएं, समाचार, विज्ञापन प्रकाशित करवाने हेतु आप 098126-19292 पर संपर्क करे सकते है।

BREAKING NEWS:

महान कलाकार थी-नरगिस दत्त

अभिनेत्री नरगिस दत्त एक महान कलाकार थी, जिसने अपनी छोटी आयु में ही कला जगत में प्रवेश किया और लगभग पांच दर्जन से ज्यादा फिल्मों में काम करके अपने अभिनय की छाप दर्शकों पर छोड़ी। नरगिस का जन्म वर्ष 1929 में इलाहाबाद में सुप्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री एंव गायिका जॅदन बाई की कोख से हुआ। नरगिस का वास्तविक नाम ''कनीज फातिमा'' था। बचपन से ही गायकी और कलाकारी का शौक रखने वाली नरगिस की रूची और गुणों को देखते हुए उसकी मां जदन बाई ने फिल्म ''तलाश-ऐ-हक'' (1934) में बतौर बाल कलाकार प्रदर्शन करवाया, जिसकी सर्वत्र प्रशंसा हुई। इसके बाद नरगिस ने ''नाच वाली'' (1935), ''मैडम फैशन'' (1936) और ''मोती का हार'' (1937), नामक फिल्मों में बाल कलाकार के रूप में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई। 13 वर्ष की आयु में उसने ''पर्दा नशीन'' (1942) और ''तमन्ना'' (1942) फिल्मों में अपनी कलाकारी के जौहर दिखाये। प्रसद्धि फिल्म निर्देशक महबूब खान की पारखी नजर से नरगिस का अभिनय छुपा नहीं रह सका, तो उसने ''तकदीर'' (1943) में नरगिस को नायिका का अवसर दिया और जल्द ही नरगिस दर्शकों की मनपसंद अभिनेत्री बन गई। ''अनबन'' बीसवीं सदी, हुमायुं, नरगिस, मेहदीं, इस्मत इत्यादि उस समय की सबसे सफल फिल्में थी। 1748 में प्रदर्शित हुई फिल्म ''आग'' से नरगिस के फिल्मी जीवन में एक सुनहरी मोड़ आया। इस फिल्म में राजकपूर हीरो थे। इस जोड़ी ने ''आग'' फिल्म के बाद हिट फिल्मों की झड़ी लगा दी। अंदाज, बरसात, जान-पहचान, प्यार, आवारा, अम्बर, आशियाना, अनहोनी, बेवफा, आह, धुन, पापी, श्री 420 और जागते रहो, इत्यादि फिल्मों को दर्शकों ने खूब सराहा। 1951 में फिल्म बरसात की शूटिंग के दौरान यह जोड़ी एक-दूसरे के काफी करीब आ गई, परन्तु 1957 में जोड़ी बिखर गई। राजकपूर से नाराज नरगिस ने राजकपूर के विरोध को दर किनार कर एस. जौहर की फिल्म ''मिस इंडिया'' तथा महबूब खान की ''मदर इंडिया'' नामक फिल्में साईन कर ली। फिल्म मंदर इंडिया नरगिस के जीवन का एक महत्वपूर्ण मील पत्थर साबित हुई। इस फिल्म ने उसकी अदभुत कला प्रतिभा को बड़े ही बढिय़ा ढंग से दर्शकों के सामने पेश किया और सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री फिल्म फेयर अवार्ड सहित कई पुरस्कारों ने उस का उत्साह और बढ़ाया। इस फिल्म की शूटिंग दौरान घटित एक भयानक अग्रिकांड में अभिनेता सुनील दत्त ने जान पर खेल कर उसे बचा लिया और धीरे-धीरे वह इतने निकट आ गये कि विवाह बंधन में बंध गये। विवाह उपरांत नरगिस ने फिल्मी जगत को अलविदा कहने का फैसला किया, मगर सुनील दत्त के कहने पर अधूरी फिल्में पूरी करने पर सहमति जरूर प्रकट कर दी। यह फिल्में थी, घर-संसार, अदालत, लाजवंती, रात और दिन (1967)नरगिस को फिल्म मदर इंडिया के अभिनय पर फिल्म फेयर पुरस्कार के अतिरिक्त फिल्म रात और दिन के लिए भारत के राष्ट्रपति द्वारा सर्वश्रेष्ठ कलाकार का ''उर्वशी एवार्ड'' देकर सम्मानित किया गया। 1973 में महाराष्ट्र सरकार ने उसे जस्टिस ऑफ पीस उपाधि से सम्मानित किया और 1980 वह राज्यसभा सांसद बनी। समाज सेवा के कार्यों में जन कल्याण के अनेक कार्यों पर अमली जामा पहनाने वाली नरगिस अचानक कैंसर जैसी नामुराद बीमारी से हार गई। 7 मई 1981 को उसके बेटे संजय दत्त की पहली फिल्म ''रॉकी'' रीलीज होनी थी, मगर उससे चार दिन पहले ही नरगिस 3 मई 1981 को इस जहां से अलविदाई ले गई। उसके सम्मान में प्रत्येक वर्ष राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा के समय एक फिल्म को नरगिस दत्त पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है, जो कि उसके प्रति श्रद्धा और सम्मान का एक बहुत बड़ा प्रतीक है। मनमोहित (प्रैसवार्ता)

Post a Comment