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भारतीय पुलिस व्यवस्था में आमूल-चूल बदलाव की जरूरत:अरिदमन

04 जनवरी 2010
सिरसा(सिटीकिंग) सतही बदलावों पर वक्त बरबाद करने के बजाय सरकार को चाहिए कि वह भारतीय पुलिस व्यवस्था में आमूल-चूल बदलाव करने की दिशा में कदम बढ़ाए। गुलामी के दौर की कई परंपराएं व व्यवस्थाएं अब तक हमारे पुलिस तंत्र पर हावी हैं और अब वक्त आ गया है कि उन्हें एक झटके में समाप्त कर दिया जाए। सीमा सुरक्षा बल के पूर्व डिप्टी कमांडेंट और मानवाधिकारवादी अरिदमन जीत सिंह ने यह टिप्पणी चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के सामुदायिक रेडियो के कार्यक्रम वेबवार्ता में की। केंद्र निदेशक और पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह चौहान द्वारा संचालित वेबवार्ता कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि पुलिस की हर असफ लता का ठीकरा राजनेताओं के सिर पर फोडऩे से कुछ हासिल नहीं होगा। हमें बीमारी की जड़ पर चोट करनी होगी और यह जड़ भारतीय पुलिस सेवा में मौजूद है। उन्होंने कहा कि रूचिका गिरहोत्रा से लेकर जेसिका लाल और प्रियदर्शिनी मट्टू तक के मामले हों या फि र नोएडा का अरुषि हत्याकांड भारतीय पुलिस सेवा का शिखर नेतृत्व हर मोर्चे पर नाकारा साबित हुआ है। विश्व के एक दर्जन से अधिक देशों में घूम चुके और हरियाणा के कुरूक्षेत्र में निशान नाम से एक संस्था का संचालन करने वाले अरिदमन जीत सिंह नाटो के साथ भी संबद्ध हैं। उनका कहना है कि पुलिस तंत्र में बदलाव के लिए पहला कार्य होना चाहिए इसकी नियुक्ति प्रक्रिया में परिर्वतन। पुलिस सेवा में प्रवेश के मौजूदा आईपीएस मार्ग को हमेशा के लिए बंद करने की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस के कर्मचारियों व अधिकारियों की भर्ती का एक ही मार्ग होना चाहिए । ऐसा होने पर जिला व राज्यों के पुलिस प्रमुख बनने वाले अधिकारियों को भी इन पदों पर पंहुचने से पूर्व धरातल पर काम करने का अनुभव हासिल हो सके। विधि विभाग के विद्यार्थी और पूर्व वायुसैनिक सुनिल नेहरा के एक सवाल के जवाब में सिंह ने स्वीकार किया कि भ्रष्टाचार के कीटाणुओं के संक्रमण से सषस्त्र सेनाएं व न्यायपालिका भी अछूते नहीं रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस महामारी से निपटने के लिए महज सरकार के भरोसे बैठे रहने के पक्ष में वे नहीं है। आवश्यकता है एक ऐसा सामाजिक आंदोलन खडा करने की जिसके सामने तमाम नकारात्मक ताकतों को नतमस्तक होना पड़ा। उन्होंने बताया कि उनकी संस्था करनाल जिले के नीलोखेड़ी खंड में इस सिलसिले में प्रयोग के आधार पर क्रांतिकारी सतर्कता समितियां गठित कर काम कर रही है। उनका संगठन ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की तर्ज पर विभिन्न क्षेत्रों में भ्रष्टाचार के स्तर के बारे में रिपोर्ट जारी करने की मंशा रखता है। इस खंड को भ्रष्टाचार के मामले में जीेरो टोलेरेंस जोन बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि मीडिया इस लड़ाई में अहम भूमिका अदा कर सकता है। बकौल अरिदमनजीत सिंह मीडिया के विद्यार्थियों का चिंतन अगर जनोन्मुखी हो जाए तो वे कार्यक्षेत्र में पदार्पण के बाद सामाजिक बदलाव के सूत्रधार बन सकते हैं। उन्होंने चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग को विभिन्न सामाजिक मसलों पर बहस का श्रीगणेश करने के लिए बधाई दी। कार्यक्रम के अंत में विभागध्यक्ष वीरेन्द्र सिंह चौहान ने कहा कि देश में बदलाव की बयार बहनी प्रारंभ हो चुकी है और इसको रोकना किसी के लिए भी संभव नहीं होगा चूंकि नई पीढ़ी अब यथास्थितिवादियों को खुली चुनौती देने के मूड में नजर आने लगी है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार तब तक ही कायम रह सकता है जब तक कि आम आदमी उसे सहन करने के लिए राजी हो। चौहान ने कहा कि जहां कहीं कोई व्यक्ति या संगठन इसका सामना करने का साहस जुटाता है, वहां भ्रष्टाचार को हारते हुए देखा जा सकता है। आम आदमी जिस रोज इसके खिलाफ उठ खड़ा होगा उस दिन भ्रष्टाचारी लोग दुम दबाकर भागने को विवश हो जाएंगे। विमर्श में रोशन सुचान, चेतन सिंह, सुरजीत सिंह, मुकुल मोंगा और प्रवीण धून ने भी शिरकत की।

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