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सिरसा में जीव-जन्तु कल्याण एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए गठित हुआ ''सुरक्षा ट्रस्ट सिरसा''

20 फरवरी 2010
सिरसा (सिटीकिंग) सिरसा में अब होगा पर्यावरण एवं जीव-जन्तु संरक्षण जिसके लिए बकरियांवाली निवासी भंवरलाल स्वामी (सूरज) जो सात वर्षों से सांपों, बिच्छुओं, गौह आदि जहरीले जीव जो शहर के आबादी वाले इलाकों में जब घुस जाते है तो लोग इन्हें मार डालते है ऐसा न हो इसलिए सूरज कुमार द्वारा बनाई गई एस.एफ.ओ. (स्नेक फ्रैंड्स आग्रेनाइजेशन) लोगों के फोन करने या बुलाने पर पहुँच जाते है। बाद में इन जीवों को शहर की आबादी से 7 से 12 किमी. दूर खेतों व जंगलाती स्थानों पर शहर के प्रतिष्ठित व जिम्मेदार लोगों की देखरेख में छोड़ देते है। ताकि मनुष्य के साथ-साथ इन असहाय जीवों की किसी प्रकार क्षति न हो। इसके अतिरिक्त एस.एफ.ओ. सदस्य घायल पशु-पक्षियों का प्राथमिक ईलाज करने व उनको संरक्षित स्थान पर छोड़ते है। एस.एफ.ओ. के मुख्य कार्यकर्ता सूरज कुमार ने बताया कि हम समाज कल्याण के साथ-साथ हमारी प्रकृति की अमूल्य धरोहर पर्यावरण में उन पशु-पक्षियों जीव जन्तुओं पेड़-पौधों और औषधियाँ जो हमारे जीवन को अमृत तुल्य बनाने के साथ-साथ जीवन और जीविका में सहयोग देते है परन्तु विडंबना यह है कि आज बहुत से जीव-जन्तुओं की प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर है कुछ समाचार पत्रों के अनुसार दुनिया में 41,000 से अधिक प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर है। 2006 में यह संख्या 16,118 थी अब यह 41,000 से ऊपर पहुँच चुकी है। जिसमें उभयचरो, जलचरों, थलचरों की एक तिहाई आबादी खतरे में है। इसके अलावा भारत देश में भी आठ करोड़ से अधिक गिद्धों की संख्या केवल चार करोड़ पर पहुँच गयी है। जिसमें व्हाइट बैक्ड के अलावा अन्य गिद्ध शामिल है। एस.एफ.ओ. टीम के अनुसार आज तक पकडेे गये या बचाये गये सांपों के अलावा अन्य जहरीले जीवों जैसे बिच्छु, गौह आदि की संख्या भी धीरे-धीरे घटती जा रही है। इसके अलावा घरों में आम तौर पर पायी जाने वाली गौरियां, मोर, काला तीतर, खुरखाती, बटेर के साथ-साथ बारहसिंगा, नील गाय, राम गाय, लोमडियां, गीदड़, सेह, आदि जीव भी आजकल नहीं पडते जो कि मनुष्य अपने स्वार्थों के कारण प्रकृति और पर्यावरण का नुकसान करता है जो भविष्य की खुबसूरत तस्वीर को धुंधला कर देगा। भविष्य में हमारी आने वाली पिढियां प्रकृति के खुबसूरत नजारों को केवल टी.वी., इन्टरनेट व किताबों में ही देख पायेगी। दुनिया में जंगल तो होंगे पर खुशबुदार व घने पेड़ों की छांव नहीं होगी शोर तो होगा पर गौरीयां की चहचहाट, कोयल की गुंज, मोरों का नृत्य और शेरों की दहाड़ नहीं होगी। जिसके लिए मनुष्य की आधुनिकता की ओर तेज रफ्तार जिम्मेदार होगी। लेकिन आज का युवा वर्ग अगर प्रकृति द्वारा विरासत में मिली पर्यावरण संबंधी विरासत को अगर संभालना चाहे तो यह मुमकिन है कि हम लगातार बदलती हुई अनावश्यक परिस्थितियों को रोक सकते है।
जीव-जन्तु कल्याण और पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित चैरीटेबल ट्रस्ट ''सुरक्षा ट्रस्ट'' सिरसा के साथ मिलकर एस.एफ.ओ. टीम कार्य कर रही है जो युवाओं, बच्चों और समाज के जिम्मेदार व्यक्तियों को स्कूलों, कॉलिजों तथा सार्वजनिक स्थलों पर जागरूकता कार्यक्रम चलाकर या मिडिया तथा सरकार की इस क्षेत्र से संबंधित योजनाओं के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जायेगा।

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