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प्रियंका चोपडा अब राष्ट्रीय पुरस्कार के बाद किस ओर?

03 अप्रैल 2010

केवल सत्तावीस वर्ष की उम्र और उसमें से सात साल बॉलीवुड में हो गये हैं। इतने कम समय में कई हिट फिल्में देने के साथ मिस वल्र्ड का ताज सर पर होने के बाद भी प्रियंका को घमण्ड नाम की चीज छू भी नहीं गई है। यदि स्टेज शो वगैरह की बात करें तो छोटे से छोटे शहर में भी जाने पर भी प्रियंका लोगों से बडे सलीखे से बात करती है व ज्यादा किसी अनजान आदमी को पास फटकने भी नहीं देती । साथ ही उसकी कोशिश रहती है कि कोई उससे व्यक्तिगत जीवन के बारे में ज्यादा बात नहीं करें जिससे की लोगों को भी अहसास हो कि वे किसी अभिनेत्री से बात कर रहें हैं । यह प्रियंका का स्वभाव है जिसके कारण वो शालिनता के बारे में जानी जाती है। और अब तो उसकी जवाबदारी और बढ गई है जबसे उसे राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। प्रियंका चोपडा फरहान अख्तर की फिल्म ' डॉन 2 ' करने वाली है यह बात तय है । इस फिल्म में शाहरूख खान भी है यह बात पहले से ही स्पश्ट थी । परन्तु इस फिल्म में हीरोइन के बारे में असमंजस बना हुआ था । ''मैं यह फिल्म कर रही हूं यह तय है । मैंने इसके पहले पार्ट में भी काम किया था इस कारण आशा थी कि पार्ट 2 भी मैं ही करूंगी। यह एक्षन थ्रीलर फिल्म होने के कारण ही इस फिल्म में काम करने की मेरी चाहना थी। " प्रियंका ने इस बारे में टिप्पणी की। इंडस्ट्री के लोग फरहा , शाहरूख और प्रियंका की जोडी को एक साथ पर्दे पर देखने के लिए आतुर रहते है जिस प्रकार पहले लोग अक्षयकुमार और प्रियंका की जोडी के लिए आतुर रहते थे। लोगों को आशा थी कि फरहा खान की फिल्म ' तीस मार खान' में दोनों साथ दिखाई देंगे पर लोगों की यह आशा ,निराशा में बदल गई जब लोगों को मालूम पडा कि इस फिल्म में कैटरिना को लिया गया है। इस फिल्म के निर्माताओं का कहना है कि इस फिल्म के लिए केवल कैटरिना से ही संपर्क किया गया था । परन्तु वो प्रियंका के नाम पर भी विचार कर रहे थे । इस बात के बाद लोगों को दोबारा सोचना पड सकता है कि बॉलीवुड में किस अभिऩेत्री का ज्यादा सिक्का चल रहा है ? करीना कपूर व कैटरिना की नम्बर वन की लडाई में प्रियंका का स्थान कहां है ? '' सच कहूं कि मैंने कभी भी इंडस्ट्री में प्रतिसर्पधा का स्वभाव नहीं रखा हैं। मेरा मानना है कि मेरा काम ही मेरे बारे में बोलता है। कौन नम्बर वन पर है और कौन नम्बर फाइव पर इसका मेरे उपर कोई असर नहीं होता है। मेरे लिए तो यह महत्व का विषय है कि मेरे काम की यहां प्रशंसा होती है। मुझे मेरे काम से मतलब रखना है । दूसरों व उनकी फिल्मों के बारे में बोलने का मुझे कोई मतलब नहीं है। " पर बाद में प्रियंका इस बात को भी कबूल करते हुए कहती है '' मैं दूसरों की फिल्मों को देखती जरूर हूं। 'थ्री ईडियट' में करीना का काम अच्छा लगा। दूसरे बहुत से कलाकार अच्छा काम करते है परन्तु अंत में तो मुझे अपना ही कैरियर देखना है व उसकी ही चिन्ता करना है। राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने के बाद क्या आप व्यवसायिक व कलात्मक दोनों प्रकार की फिल्मों की ओर ध्यान देंगी ? इसके उत्तर में प्रियंका कहती है ,'' मैं अपने कैरियर में अब तक इसी प्रकार का प्रयत्न करती आ रही हूं । " अब प्रियंका रणबीर के साथ सिद्धार्थ आनन्द की फिल्म 'अनजाना अनजानी' में दिखाई देंगी। इसके बाद विशाल भारद्वाज की ' सात खून माफ ' भी कर रही है । इस प्रकार से स्पश्ट हो रहा है कि वह दोनों प्रकार के काम की ओर ध्यान दे रही है । विषाल की फिल्म ' डॉन दो' प्रियंका को इस वर्श व्यस्त रखेगा । फिर ' दोस्ताना दो' के लिए प्रियंका को कहां से समय मिल पाएगा यह प्रश्र लोगों को कचोटता है । लोगों की शंका का समाधान करते हुए प्रियंका कहती है ,'' मूल फिल्म में मेरी बात हुई थी कि दोनों हीरो में से किसी के साथ जोडी नहीं बनानी है । अब फिल्म में मेरी मुख्य भूमिका का रहने का सवाल ही पैदा नहीं होता । इसमें मेरी विशेष भूमिका हो सकती है। असल फिल्म में मैं बॉबी देओल के साथ जिन्दगी बिताने निकलने के कारण इस फिल्म में मैं दोनों हीरोज की मि़त्र के नाते एक छोटे रोल में दिखाई दे सकती हूं ।' आखरी रिजीजफिल्म ' प्यार इम्पासिबल' कुछ खास नहीं रही पर ' फैशन' फिल्म की सफलता का जादू अभी बरकरार है जिसके सहारे प्रियंका की गाडी चलती रहेगी क्योंकि प्रियंका नये -नये प्रयोग करने में भी नहीं डरती । जल्द ही वह एक ही फिल्म में 12 अवतारों में दिखाई देंगी। पर जब उनसे इसके बारे में पूछा गया तो उनका कहना था ,'' मैं अभी आपको क्यों बताउ , मैं लोगों का सरप्राइज देना चाहती हूं । -अशोक भाटिया, मुंबई

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निर्माता और कलाकार-दोनो नावों पर सवार अमिता पाठक

31 मार्च 2010
फिल्म 'अथिति तुम कब जाओगे' की सफलता के बाद निर्मात्री व एक्ट्रेस अमिता पाठक की अगली फिल्म की तैयारी हो गई है । इस फिल्म के निर्देशक है प्रियदर्शन जहां अमिता ,अजय देवगन , बिपाशा बसु व अक्षय खन्ना के साथ दिखाई देंगी। अमिता का कहना है ,''अब मेरा अच्छा समय शुरू हो गया है व इसका फायदा वह जल्द से जल्द उठा लेना चाहती है । फिल्म का नाम हालांकि नहीं रखा गया है पर यह जल्द ही शुरू हो जाएगी ।" कुमार मंगत जी की सुपुत्री अमिता ने एक्टिंग के साथ - साथ निर्माण के क्षेत्र में भी 'अथिति तुम कब जाओगे' से शुरू किया जो आज भी जारी है और जल्द ही अगली फिल्म भी फ्लोर पर जा रही है । पहली बार निर्माता के रूप में काम करने का उनका क्या अनुभव रहा ? इस बारे में वह बताती है ,'' मेरे सामने बहुत सी कठिनाइयां थी । नया समझ कर हर कोई दबाव बनाये रखना चाहता था। पर मेरे पिता कुमार मंगत व अजय ने मुझे हमेशा सहायता की व हौसला बढाए रखा। एक निर्माता व एक एक्ट्रेस के रूप में उनका पहला प्यार क्या होगा? के उत्तर में वह स्पष्ट करती है ,'' फिल्म ' हाले दिल ' के बाद जब मैं निर्माण के क्षेत्र में उतरी तो लोगों को यह लगा कि शायद मैं अब एक्टिंग के क्षेत्र में रूचि नहीं लुंगी पर मैं आपको बता दूं कि मेरा पहला प्यार एक्टिंग ही है।" यदि अमिता का पहला प्यार एक्टिंग है तो क्या उसने इस प्यार को सफल बनाने के लिए बचपन से ही तैयारी की थी? इस बारे में वह बताती है ,'' बचपन से ही में एक्ट्रेस बनना चाहती थी और मैं माधुरी दीक्षित की बहुत बडी फैन थी। वहीे मेरी प्रेरणा रही व मैं उनकी तरह ही एक महान एक्ट्रेस बनना चाहती हूं। इसके लिए मैंने बाकायदा किशोर नमित कपूर से एक्टिंग सीखी व बाद में शामल डॉवर जी के यहां से न्त्य की षिक्षा ली।" यही नहीं अमिता ने निर्देशक के रूप में भी हाथ आजमाया है तो क्या वह निर्देशक भी बनना चाहती है? इस बारे में वह इस प्रकार खुलासा करती है ," पिताजी का कहना था कि निर्माता के रूप में आने से पहले मुझे निर्माण की बारीकिया समझ लेना चाहीए , सो मैंने फिल्म 'औंकारा' में निर्देशक विशाल भारद्वाज जी के साथ सहायक के रूप में काम कर लिया था ।" -अशोक भाटिया, मुंबई

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अपनी छवि को बदलने में व्यस्त-दीपल शाह

22 मार्च 2010
मुंबई(अशोक भाटिया) हाल ही में रिलीज फिल्म ' वेडनेस्डे' जिसे कई टी वी चैनल कई - कई बार दिखा चुके है में एक प्रेस रिपोर्टर की सीधी सादी भूमिका करने वाली लडकी के बारे में कोई सोच भी नहीं सकता कि यह ''कभी आर कभी पार" जैसा ग्लैमर म्यूजिक अलबम भी कर चुकी है। हम बात कर रहे है बेबी डॉल के नाम से मशहूर दीपल शाह की। यही हीं दीपल ने एक ग्लैमर भूमिका वाली फिल्म भी की 'कलयुग' जिसने बाक्स आफिस पर सफलता के झंडे फहराए। पर इससे दीपल के कैरियर को कोई फायदा नहीं मिला। 2009 में रिलीज फिल्म 'कर्मा ,कनफेशन हॉट' जैसी फ्लाप फिल्म के रिलीज से भी उसका कैरियर बेहाल रहा। हाल ही में उसने अपनी ईमेज बदलने के चक्कर में बडी कास्ट वाली फिल्म ' राइट या रांग' में भी छोटा सा रोल कर लिया पर अभी तक बेबी डॉल वाली इमेज उससे जुडी हुई है उत्तर प्रदेश से आकर मुंबई में बसे परिवार में दीपल का जन्म 1986 में मुबई में ही हुआ। सेंट झेवियर कॉलेज से उच्च षिक्षा प्राप्त दीपल ने अपना कैरियर एक मॉडल के रूप में शुरू किया सन 2004 में मिस इंडिया के चुनाव में भी भाग लिया। इस समय जल्द दीपल की एक फिल्म 'विकल्प' रही है जिसमें वह मुख्य भूमिका में दिखाई देंगी।
पेश है हाल ही में हुई दीपल से बातचीत के प्रमुख अंश:-
सबसे पहले तो आप आपकी आने वाली फिल्म ' विकल्प' में अपनी भूमिका के बारे में बताइये?
मैं इस फिल्म में अपने किरदार को लेकर अती उत्साहित हूं क्यों कि मैं पहली बार महिला प्रधान वाली मुख्य भूमिका कर रही हूं। यह एक तरह की ही ठहराव वाली भूमिका नहीं है यह एक युवा साफ्ट वेयर इंजिनीयर की कहानी है जो अपने दम पर अपने देश के लिए टेक्नालाजी के क्षेत्र में कुछ करना चाहती है। उसका मिशन पूरा करने में उसे तब सहायता मिलती है जब देश में कुछ आतंकवादी घुस जाते है। यह भूमिका पूर्ण रूप से कुछ कर दिखाने की चैलेजिंग भूमिका है। मुझे इस फिल्म में बहुत ही कठिन मराठी भी बोलनी पडी है क्योंकि मेरी भूमिका कोल्हापूर से शुरू होकर मुंबई तक आती है। इस फिल्म के निर्देशक मराठी फिल्मों के निर्देशक सचिन पी. कराड हैं।
आपने आपकी हालिया फिल्म ' राइट या रांग' देखी है ?
नहीं मैंने यह फिल्म नहीं देखी है इस कारण इस बारे में मैं कुछ नहीं कह सकती पर मैंने इस फिल्म की शूटिंग बहुत की है जब मैंने फिल्म को साइन किया था तब मुझे बताया गया था कि मेरा इरफान खान के आपोजिट लव एंगल भूमिका है जो फिल्म के दो हीरो में से एक है। मेरा इस फिल्म में रियल लाइफ के कॉप वाली भूमिका है फिल्मों वाले कॉप की नहीं। इस फिल्म को साइन करने का एक कारण यह भी था कि मुझे बताया गया था कि मेरी भूमिका की लंबाई फिल्म के अन्य कलाकारों सन्नी देओल ,कोंकणा सेन षर्मा के बराबर होगी।
परन्तु फिल्म के प्रचार में ही आपका नाम कहीं नहीं था ?
मैं जानती हूं पर इस बारे में मैं कुछ नहीं कह सकती,यह निर्णय फिल्म के निर्माताओं का है मैं इस बारे में अब उनसे नहीं उलझना चाहती
यह क्या अब आपका नया अवतार समझा जाए कि आपके संगीत वीडियो से बनी सेक्स बम्ब वाली ईमेज को आप ' वेडनस्डेÓ, राइट या रांग' ' विकल्प' जैसी फिल्मों के द्वारा बदलना चाहती है ?
मैं इसे पूरी तरह से नकार तो नहीं सकती मैं अपनी इमेज एक एक्टेऊस के रूप में ढालना चाहती हूं ये नहीं की कुछ सेक्सी गानें पर्दे पर करने सेक्सी बम्ब की इमेज लेकर पर्दे के पीछे खो जाना नहीं चाहती हूं मेरे वीडियो अलबम में भी कहीं अश्लीलता नहीं थी। यदि आप मेरे ' कलयुग' वाले किरदार को भी देखें तो एक पोर्न एक्टेऊस के किरदार के बावजूद कहीं भी अंग प्रदर्शन नहीं था।
यानी आगे आप आइटम . नहीं करेंगी ?
हाल फिलहाल तो मैं ऐसी भूमिकाएं करना चाहती हूं जो मुझे एक अच्छी अभिनेत्री के रूप में उभार सकें। मुझे ग्लैमर से भी कोई परहेज नहीं है यदि वो मेरी भूमिका में उभार ला सकता हो
आपकी एक फिल्म 'कर्मा ,कनफेशन हॉट' ने रिलीज होने में बहुत ही समय लगा दिया शायद इसी कारण फिल्म कुछ खास नहीं चली ?
फिल्म में कई बडे कलाकार होने के कारण फिल्म समय से नहीं बन पाई क्योंकि उनकी डेट्स का प्रोबलम होता था। अब अकेले इस असफलता का ठिकरा मेरे उपर तो नहीं फोडा जा सकता न।

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मेरे बाद ही मेरी पुस्तक छपेगी:नाना पाटेंकर

15 मार्च 2010
मुंबई(अशोक भाटिया) फिल्मों में व राष्ट्र प्रेम के किरदार करने वाले नाना पाटेकर इस समय अपनी आने वाली पुस्तक के लेखन में व्यस्त हैं। बहुत कम लोगों को पता होगा कि नाना पाटेकर एक व्यस्त कलाकार के अलावा कहानीकार, गीतकार व अच्छे लेखक भी है। पर कुछ कारणों के कारण वे नहीं चाहते कि उनके लेखों को सार्वजनिक किया जाए। एक कलाकार के रूप में ख्याती प्राप्त नाना ऐसा क्यों कर रहे है हमनें यह जानने के लिए साथ ही महाराष्ट्र में चल रहे भाषाई विवाद के बारे में उनके विचार जानने के लिए हाल ही में उनसे बातचीत की। पेश है उस बातचीत के प्रमुख अंश:-
हमनें सुना है कि आप एक अच्छे लेखक है और बहुत कुछ लिखा भी है तो क्या उसमें से कुछ प्रकाशन होने जा रहा है?
हां यह सही है कि मैंने बहुत कुछ लिखा है पर मैंने अपने परिवार वालों से कह रखा है कि यदि वे चाहे तो मेरे बाद इसका प्रकाशन करवा सकते है । इसलिए अब यह बताना आवश्यक नहीं है कि मैंने क्या लिखा है। मैं समझता हूं कि हर कोई वो सब लिख सकता है जो वह महसूस करता है। यदि वो अच्छा हो तो कभी भी प्रकाशित हो सकता है और अच्छा नहीं हो तो कभी भी नहीं। पर आदमी को हमेशा लिखते रहना चाहिए । आप पुस्तकों को कितना महत्व देते है?-पुस्तकों की बहुत ही अहमियत है क्योंकि कई चीजें हम बार बार पढना चाहते है। किताबों के होने से भूली बिसरी बातें तरो ताजा हो जाती है।
आपकी सबसे पसंदीदा कौन सी पुस्तक है?
यह कह पाना तो बहुत ही कठिन होगा़....परन्तु मैंने हाल ही में ' थ्री कॉप्स ऑफ टी ' व ' ए थाउजण्ड स्पेन्डीड सपस् ' पढी थी । दोनों ही अच्छी पुस्तके थी।
आप मराठी है तब आपकों कैसा लगता है जब मराठी साहित्य को महाराष्ट्र से बाहर कोई महत्व नहीं मिलता?
मैं ऐसा कुछ भी महसूस नहीं करता हूं। मैं जानता हूं कि कोई भी भाषा किसी दूसरी भाषा को नहीं मार सकती । यदि आप मेरी भाषा का सम्मान करते हुए उसे सीखेंगे तो मैं भी आपके साथ वैसा ही करूंगा। भाषा पर विवाद लंबा नहीं होना चाहिए। हम केवल मुंबई और महाराष्ट्र की बात ही क्यों करते है हमें देश की हर भाषा के बारे में सोचना चाहिए।
मुंबई में हुए या हो रहे आंतकवादी खतरों के बारे में आपका क्या सोचना है?
लोग बाहर से यहां मुंबई आते है और हमारे घर पर हमला करते है। हम दूसरे दिन समाचार पत्र में पढते है पर कुछ कर नहीं पाते है। कभी मैं सोचता हूं कि मैं अकेला पूर्ण नहीं हूं। मैं कुछ करना चाहता हूं पर कुछ कर नहीं पाता हूं । हम सोचते है कि इन आतंकवादी हमलों के कारण हमारी मौत हो सकती है पर रोज - रोज मरने से तो अच्छा है एक दिन मर जाना। हमें आंतकवादी गतिविधियों का खुल कर सामना करना चाहिए।
बहुत जल्द आप ' राजनीति' में आ रहे है उसके बारे में कुछ बताना चाहेंगे?
इस फिल्म के बारे में अभी कुछ बताना जल्दबाजी हो जायेगी। मैं केवल यह बताना चाहूंगा कि यह फिल्म बहुत बडा बदलाव लायेगी। मैं समझता हूं कि प्रकाश झा कि यह सबसे बडी कृति होगी।

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'शापित' में मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला: श्वेता अग्रवाल

10 मार्च 2010
मुंबई(अशोक भाटिया) श्वेता अग्रवाल फिल्म 'शॉपित' के पहले एक टर्किश फिल्म 'मिरार' में और ओलिवर पॉलिस की स्विस जर्मन फिल्म 'तंदूरी लव' में भी अभिनय कर चुकी है । 'स्टार प्लस' पर प्रसारित धारावाहिक 'देखो मगर प्यार से' में मोटी सी लडकी के किरदार में नजर आ चुकी श्वेता अग्रवाल इन दिनों फिल्म सर्जक विक्रम भट्ट की खोज के रूप में उनकी आगामी फिल्म 'शॉपित' मे अभिनय करके चर्चा का विषय बनी हुई है । इस फिल्म में उनके हीरो है मे मशहूर संगीतकार उदित नारायण के बेटे आदित्य नारायण है । देखा जाए तो यह फिल्म श्वेता के लिए डेब्यू होगी व अपनी बॉलीवुड की पहली ही फिल्म विक्रम भट्ट की हॉरर फिल्म 'शॉपित' से कर रही है ।
कैसा लग रहा है अपनी पहली बॉलीवुड फिल्म को करके ?
पहले मैं बहुत ही डरी हुई थी कि बॉलीवुड में मेरी पहली फिल्म ही विक्रम भट्ट जैसे महान निर्देशक के साथ करने को मिल रही है । फिल्म 'शॉपित' एक हॉरर फिल्म होने के साथ साथ प्रेम कहानी वाली भी फिल्म हैं । विक्रम भट्ट उन निर्देशकों में से हैं ,जो अपने दर्शकों को अपनी फिल्म के द्वारा एक जगह पर बैठे रहने के लिए मजबूर कर देते हैं । मुझे पूरा यकीन हैं कि उनकी फिल्म 'शॉपित' दर्शकों निराश नहीं करेगी । इन्ही सब कारणों से मुझे इस फिल्म को करने में मजा आ रहा हैं ।
इस फिल्म में अपने किरदार के बारे में बताइयें ?
इस फिल्म में मैंने काया का किरदार निभाया है जो कि एक रायल परिवार की कॉलेज में पढने वाली लडकी है । काया को इस बात की जानकारी नहीं है कि उसके परिवार को 300 साल पहले एक श्रॉप मिला था जिसकी वजह से इस परिवार की कोई लडकी जब भी शादी करना चाहेगी तो बुरी ताकत उसे खत्म कर देगी । प्यार के सागर में डूबी काया अपने प्रेमी अमन से सगाई करके जैसे ही सगाई की अंगूठी पहनती हैं वैसे ही वह बुरी आत्मा उसके पीछे पड जाती हैं । तब काया के माता पिता काया को उसके शापित होने की बात बताते हैं । इसके बाद भी काया का प्रेमी अमन उससे रिश्ता नहीं तोडता क्योंकि काया और अमन ने तो पूरी जिन्दगी एक साथ रहने का इरादा पक्का किया हुआ हैं । फिर यह दोनों उस बुरी आत्मा से बचने के लिए क्या क्या नहीं करते हैं यह डरावना मंजर इस फिल्म में दिखाया गया है ।
आपको नहीं लगता कि आपको अपना कैरियर हॉरर फिल्म से शुरू करना मंहगा पड सकता हैं ?
मैं मानती हूं कि बॉलीवुड में हॉरर फिल्म के साथ कैरियर शुरू करना काफी रिस्की है। लेकिन मुझे इसमें कोई रिस्क नहीं लगती और न ही किसी से मेरी इस बारे में शिकायत है । मुझे विक्रम भट्ट की फिल्म होने से इस फिल्म पर पूरा भरोसा है । वैसे 'शापित' में पागलपन वाला हॉरर नहीं हैं । इसमें एक प्रेम कहानी है । काया और अमन एक दूसरे से बहुत ज्यादा प्यार करते हैं । वे एक दूसरे पर जान न्यौछावर करने वाला प्यार करते है । बुरी आत्मा से बचने के लिए वे क्या क्या नहीं करते हैं और बुरी आत्मा किस तरह उनका पीछा करता है और कई तरह के घटनाक्रम होते है। इस फिल्म की कहानी में रोचकता के साथ डरावनापन भी है।
फिल्म की शूटिंग के दौरान क्या अनुभव रहा ?
इस फिल्म में काम करना मेरे लिए बहुत बडी चुनौती के रूप में था क्योंकि मैं भी एक जगह बैठकर हॉरर को नहीं देख सकती थी । इसी वजह से इस फिल्म की शूटिंग के दौरान मैं खुद डरी हुई रहती थी । एक बार एक ऐसा दृश्य फिल्माया जा रहा था ,जिसके लिए मुझे एक जगह बंद कर दिया जाता हैं । वहां मिट्टी थी ,गंदगी थी और जगह इतनी सकरी थी कि मैं हिल डुल भी नहीं सकती थी । दीवार से चेहरा सटा हुआ था । मैं न बाहर वालों की आवाज सुन सकती थी , न बाहर वाले मेरी । कैमरा अपना काम कर रहा था । तभी अचानक एक मकडी वहां आ गयी । मकडी से तो मैं बहुत डरती हूं । मुझे लगा कि मेरी जिन्दगी खत्म हो गयी । मैं बुरी तरह डर व सहम गई थी । जैसे ही सीन ओ.के. हुआ व दरवाजा खुला , मैं जोर - जोर से रोने लगी । डरी सहमी मैं आधे घंटे तक रोती रही । विक्रम भट्ट वगैरह ने मुझे काफि समझाया । बडी मुश्किल से दो घंटे बाद मेरे अंदर का डर खत्म हुआ और मैं नारमल हो सकी ।
निर्देशक विक्रम भट्ट के साथ काम करने का क्या अनुभव रहा ?
बहुत ही अच्छा अनुभव रहा । मुझे उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला । हर फिल्मकार की काम करने की अपनी अलग स्टाइल होती है । विक्रम भट्ट की तो स्टाइल ही अलग हैं। वह तो हमारे गुरू की तरह हमें काम के बारे में बता रहे थे । उन्होंने हमारी बहुत मदद की । वह खुद सीन करके बताते थे कि हमें किस प्रकार करना है । इसके बावजूद जब समस्या हल नहीं होती थी तो वह दृष्य में कुछ बदलाव भी करते थे । विक्रम भट्ट जी खुल विचारों के है । उनके साथ काम करके बहुत ही मजा आया । मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा ।
क्या कारण है कि 'शापित' बन कर तैयार है और आपने अभी तक कोई दूसरी फिल्म साइन नहीं की है ?
मैं पिछले डेढ साल से 'शापित' के साथ इस तरह जुडी हुई हूं कि कुछ और सोचने का मौका ही नहीं मिला । मेरे दिमाग में ही नहीं आया कि मुझे किसी नये प्रोजक्ट से भी जुडना चाहिए । अब जब आप लोग सवाल कर रहें हैं तो मुझे लगता हैं कि अब मुझे दूसरी तरफ भी ध्यान देना पडेगा । मुझे हर निर्माता - निर्देषक व कलाकार के साथ काम करना हैं बषर्ते अच्छी पटकथा व उसमें मेरा किरदार दमदार हो । मैं यहां तब तक रहूंगी जब तक मुझे काम मिलेगा और लोग मुझे परदे पर देखना पसंद करेंगे । मैं अपनी ओर से सर्वश्रेश्ठ परफार्मेंस देने का पूरा प्रयास करूंगी ।
आप अंतराष्ट्रीय फिल्मों से पहले अपने कॉलेज के दिनों में 'देखो मगर प्यार से' एक धारावाहिक भी कर चुकी है तो क्या अब टी वी सीरियल भी करेंगी ?
फिलहाल तो मैं फिल्में ही करना चाहुंगी जो मेरी प्राथमिकता है पर भविष्य में कुछ अच्छा ऑफर मिला तो टी वी भी कर सकती हूं ।

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मैं एकता कपूर से नहीं डरती - ज्योति गाबा

10 मार्च 2010
मुंबई(अशोक भाटिया) ज्योति गाबा का नाम लेने पर लोगों के जहन में उनका चेहरा नहीं आयेगा पर यह निश्चित हैं कि फिल्म 'इडियट बाक्स' के रिलीज होते ही यह नाम घर -घर में चर्चा का विषय होगा । इस फिल्म की कहानी इस बात पर आधारित है कि टी वी ने लोगों की जिन्दगी में कितना अहम दखल देना शुरु कर दिया है । इस फिल्म में ज्योति टी वी की चर्चित सुपर स्टार क्वीन ऐकता कपूर से प्रभावित किरदार अनेकता कपूर निभा रही है । हाल ही में फिल्म के प्रचारक आई एम पन्नू ने हमारी बातचीत ज्योति से करवाई । पेश है उस बातचीत के प्रमुख अंश:-
जब आपको इस फिल्म में इस महत्वपूर्ण किरदार के लिए चुना गया तब आपको कैसा महसूस हुआ ?
यह एक अलग ही प्रकार का अनुभव है । जब मुझे पहली बार इस फिल्म में मुझे मेरा किरदार सुनाया गया तो मुझे लगा कि यह मेरे लिए बहुत ही चुनौतिपूर्ण किरदार है । आज एकता कपूर बहुत बडा नाम है और यह मेरे लिए गर्व की बात है कि मैं ऐसी भूमिका कर रही हूं जो एकता कपूर से प्रभावित है ।
आपने इस भूमिका को करने के लिए किस तरह की तैयारी की और फिल्म के पर्दे पर उसे उतारने में किस प्रकार की कठिनाईयों का सामना करना पडा?
सच बताउ तो मुझे इस तरह की भूमिका कैमरे के सामने करने में जरा भी कठिनाई नहीं आई क्योंकि मुझे पहले से ही इस भूमिका के बारे में बहुत कुछ बता दिया गया था । इस फिल्म के निर्देशक सुनन्दा मित्रा ने पहले ही से इस भूमिका के बारे में विस्तृत से समझा दिया था और स्पष्ट था कि मुझे कैमरे के सामने किस प्रकार प्रस्तुत होना है । इसके अलावा मुझे इसके लिए कुछ खास होमवर्क नहीं करना पडा था ।
इस समय आप इस फिल्म को लेकर कितना उत्साहित है ?
मैंने इसके पहले फिल्म 'थोड़ा प्यार थोडा मेजिक', ' सुनो ना' वगैरह की है तथा बहुत से धारावाहिक किये है पर पहली बार कुछ अलग करने को मिला है । यह मेरे पिछले काम से बिल्कुल ही अलग है । मैंनें अब तक 300 विज्ञापन फिल्में की है उसमें से बहुत सी जवान गृहिणी अथवा जवान प्यारी मॉं की भूमिकाए वाली थी । इस फिल्म में मेरे लिए एक मौका था कि मैं अनेकता कपूर के रुप में अपने को एक अच्छे कलाकार के रुप में स्थापित कर सकूं । इसलिए इस फिल्म को लेकर उत्साहित होना स्वाभाविक है ।
नाम व आपके मेकअप के अलावा आपकी कौनसी बात एकता कपूर से मिलती है ? एकता कपूर बालाजी टेलिफिल्म की मुखिया है और इस फिल्म में मेरी कंपनी का नाम लालाजी टेलिफिल्म है । एकता हाथ में अंगुठियां पहनना पसंद करती है और फिल्म में मैं भी बहुत सी रिंगस् पहनती हूं । मेरी चाल ढाल , पहनावे को भी बिल्कुल एकता के समान दिखाया गया है ।
आप असल जिन्दगी में एकता से मिल चुकी है ?
दुर्भाग्यवंश नहीं , पर एक अवार्ड फॅंक्षन में मैंने उनको बहुत ही करीब से देखा था , बस । परन्तु मैंने उनके बारे में बहुत कुछ अखबारों में पढा है । कुछ बातें मुझे उसके करीबी दोस्तों से भी जानने को मिली और उन सब बातों की जानकरी होने के कारण मुझे अपनी भूमिका निभाने में सहायता भी मिली । मैंने जो जानकारी प्राप्त की थी उसके अनुसार एकता बहुत ही कडक व मेहनती महिला है ।
क्या आपको लगता है कि ऐकता इस फिल्म को देख कर कुछ नाराज होगी ?
नहीं मुझे ऐसा नहीं लगता । हमारा ऐसा कुछ विचार नहीं था कि उनको इस फिल्म के माध्यम से थोडा भी अपसेट किया जाए । वह स्वयं एक समझदार फिल्म निर्माता है । उन्हें पता है कि फिल्म को फिल्म की दृश्टी से ही देखा जाता है व्यक्तिगत तौर पर नहीं । हमनें फिल्म में उनको सकारात्मक रुप में पेष किया है और फिल्म देख कर उन्हें फिल्म पर गर्व होगा ।
फिल्म के रिलीज के समय यदि आपका सामना ऐकता कपूर से हो गया तो आप क्या करेंगी ?
मैं उनसे डरुंगी नहीं बल्कि उनके पास जाकर नम्रता से अपना परिचय दूंगी कि ....हाय मैं अनेकता कपूर हूं ।
भविष्य में और कोई जिन्दा आदमी का किरदार जिसे आप अपने अभिनय द्वारा पर्दे पर साकार करना चाहे ?
हां , ऐसा मौका मिला तो मैं सोनिया गांधी की भूमिका करना चाहूंगी ।
अंत में आप 'इडियट बाक्स' के बारे में चंद शब्दों में क्या कहना चाहेंगी ?
यह कोई हकीकत नहीं है । एक हास्य फिल्म है । जब भी दर्षक इस फिल्म को देखे तो महसूस करें कि यही आज घर -घर की कहानी है और उसे अपने ही घर की कहानी समझे । मुझे आशा है कि दर्शक इस फिल्म को अवश्य स्वीकार करेंगे ।

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